हर मुलाकात पर वह मेरे करीब होने लगे उनको करीब होते देख कर हम ज़िंदगी का सपना संजोने लगे मन खुशी से झूम जाता है उनके वादों से मेरे दिल के आसपास प्यार के फूल खिलने लगे हैं
कभी सोचा ना था यूं छोड़ जाएंगे जो हर वक्त मेरे दीदार को बेचैन रहते हैं टूट कर बिखर गए शीशे की तरह दर्पण में खुद को पहचान नहीं पाते हैं