जब प्यार परवान चढ़ता है हर दीवार टूट जाती है मिलने से रोकने की कोशिश करती है जो सच्ची मोहब्बत हो जाए किसी से फिर जान बनके दिल में उतर जाती है
कभी सोचा ना था यूं छोड़ जाएंगे जो हर वक्त मेरे दीदार को बेचैन रहते हैं टूट कर बिखर गए शीशे की तरह दर्पण में खुद को पहचान नहीं पाते हैं