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कभी सोचा ना था यूं छोड़ जाएंगे

कभी सोचा ना था यूं छोड़ जाएंगे जो हर वक्त मेरे दीदार को बेचैन रहते हैं टूट कर बिखर गए शीशे की तरह दर्पण में खुद को पहचान नहीं पाते हैं

हिंदी शायरी | शायरी संग्रह

HINDI SHAYARI | SHAYARI SANGRAH तुम गुनहगार हो मुझे शिकायत है फिर भी ना जाने क्यों तुम्हें बेकसूर समझकर छोड़ देने की चाहत है कोई सजा दूं मेरे दिल को तकलीफ होती है सभी लोग अपनों से हार जाते हैं लंबे समय से रिश्ता तोड़ने की कोशिश करता रहा हूं तुम्हारी गुस्ताखी से लड़ता रहा हूं दर्द हद से ज्यादा मिला है मैं गम में जिए जा रहा हूं आजकल आंखों से आंसू रुकते नहीं है जो तुझमें वफा ढूंढने की कोशिश रही है उम्मीदों पर पानी फिरने लगा है अपनी मोहब्बत का मीठा जहर मेरे जिंदगी में घोलकर सिर्फ गुमराह करती रही हो जिस तरह बर्बाद हो गया हूं न हंस पा रहा हूं न रो पा रहा हूं shayari

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